"Let Poetry Work its Magic: Soulful Hindi Poems and Hindi Rhymes for Everyday Inspiration" - "Poetry Magic: Soulful Poems and Rhymes Inspired by Daily Life"

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51. ङरों का सामना
चलो अब सुधार लाते हैं इसमे,
सकारात्मक पक्ष कुछ दिखाते हैं इसमे...

एक नयी शुरूवात करते हैं,
सच से वापस एक बार परिचय करते हैं...

एक छोटी सी बच्ची नादान थीं,
ख़ुश थी बहोत क्यू की डर से वो अंजान थीं…

अरमानों से थी भरी उसकी एक दुनिया,
ख़्वाबों से सजी थी उसकी एक दुनिया…

एक था वक्त्त जब थी सब बातें इन की प्रेरणा से भरी,
वही था वक्त्त जब जीवन मैं नहीं थी अभिप्रेरण (motivation) की कोई कमी…

जब इन्हे था ये विश्वास कि नहीं ये  कम किसी से,
जब नहीं डरती थी ये गम किसी से…

अचानक भूल गईं ये कि दिल है इनका प्यार का सागर,
ना कमे गा उसमे प्यार कभी,
चाहए भर कर उस से निकाल लो  कितने भी अनगिनत गागर…

ना कमे कभी भी उसका आकार,
ना आए उसमे कभी द्वेष के विचार …

भूल गई ये कि डर से डर कर किसी नें क्या है पाया,
डर से डर कर उल्टा उसे और बड़ा और खौफनाक बनाया...

ना जाने कहा से ये सवाल आया,
ना जाने क्यों इन का मन घबराया...

भूल गई ये कि जब डर का सामना डटकर  करेंगी,
ख़ुद प़र विश्वास कर डर को जब मोह तोड जवाब देंगी तब ही विजय और विजस्वी होगीं ....

*************************

जा तुझसे मैं नहीं डरती,
अपने कर्म करने से पीछे मैं नहीं हटती...

भगवान का आशिर्वाद मेरे साथ है,
मेरे दोस्तों और परिवार का प्यार मेरे साथ है...

ऐसे ही नहीं सब आज भी मेरे साथ है,
जरूर मुझमैं कोई बात तो ख़ास है...

सब को जब मुझपर इतना विश्वास है,
जरूर मुझमैं कोई बात तो ख़ास है...

सब की जब मुझसे जुड़ी इतनी आस है,
जरूर मुझमैं कोई बात तो ख़ास है ...

मुझमें जीवन मे जीत की नहीं सब कि भलाई की प्यास है,
शायद मेरी यही बात खास है...

सब से स्वार्थरहित प्यार मैं करती,
सब कि भावनाओं की कदर मैं रखती...

सब को सम्मान मैं देती हूँ,
सच के लिए लड़ने से मैं नहीं कभीं डरती हूँ ...

दूसरों कि मदद करने से नहीं कभी पीछे हटी हूँ ,
मुसीबतों से हमेशा हस कर मैं लडी हूँ ...

कभीं मैंने जीवन मैं हार नही मानी है ,
हरदम कोशिश करते रहना यही बात मैंने जानी है ...

सब पर विश्वास मैं करती हूँ ,
ठोकर लगने से मैं नहीं डरती हूँ ...

मैं ख़ुद से बहोत प्यार करतीं हूँ ,
प़र दूसरों कि खुशियों को अपने से ऊपर रखती हूँ ...

मुझे अपने प्यार की शक्ती पर विश्वास है,
पत्थर को पिघला मोम बना दे ऐसा इसमे कुछ ख़ास है...

सब का दिल मैं जीत लेती हूँ,
उनके जीवन मे खुशिया भर देतीं  हूँ...

मेरी सुन्दर मुस्कान सब के जीवन में उजाला ले आती है,
हारे हुए दिलों मैं भी एक नयी उम्मीद , एक नयी उमंग जगाती है...

मैं कभीं कोई काम अधूरा नहीं छोड़ती,
मैं कभीं किसी दोस्त का हाथ बीच राह में नहीं छोड़ती …

मैं हमेशा अपनी जिम्मेदारियाँ पुरी करती,
मैं बिना कारण कभी किसी का दिल नहीं तोड़ती...

मेरी शक्ति मेरी आस्था और विश्वास है,
भगवान प़र अटूट मेरे विश्वास के कारण उनकी पूरी कृपा मेरे साथ है …

चाँद सा शीतल मन है मेरा,
सब का मंगल करना ही धर्म है मेरा..

किसी से बदले की भावना नहीं कभी मेरी,
सब का मंगल हो यही कामना है मेरी…

मुझे किसी से कोई शिक़ायत नही ,
नफरत किसी के लिये दिल मे रखनाः मेरी फितरत नही …

माफ़ करना बुज्दधिल कि नही ताकतवर कि निशानी है,
सब की गलतियों को क्षमा दान देने की आज मैंने ठानी है …

मुझे नहीं कोई लालच ,
ना किसी डर से कोई खौफ रहा...

मैरी ना किसी से कोई दुश्मनी ना कोई द्वेष है ,
मेरे जीवन मैं नही कोई लडाई झगड़ा या क्लेश है ...

मोह माया मे तो सब फस जाते हैं,
पर ताकतवर ही उनसे वापस पार पाते हैं ...

मैं प्यार से हर समस्या का हल ढूँढ लेती हूँ ,
मैं प्यार से ही हर काम सुलझा लेती हूँ …

***************

जब डर को डराने की शक्ति रखो गे...
तब डर को हराने वाले व्यक्ति बनो गे..

प्यार की ताकत से डर भी डरता है,
प्यार की ताकत के आगे डर भी पाणि भर्ता है …

कहीं डर को प्यार हरा ना दे,
कहीं डर को प्यार हमेशा के लिये मिटा ना दे …
प्यार की ताकत आपार है,
प्यार के आगे सब डर कमज़ोर और बेकार है …
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52. बेदर्द सनम
बेदर्द सनम,
आप को पहचान गए हैं हम...

आप की आँखें रहती हैं नम्भ,
छिपाते हो दुनिया से दिल की बातें और अपने सब गम ...

बनते हो बिन्दास हरदम,
रख के दिल मैं लाखों राज् दफन...😬😇😂

दिल मैं बसा है आप के ये वतन,
जीते हो जिंदगी जैसे बाँध के सर पर कफन....

नहीं बांट ते किसी से अपना मन,🥺
या फिर अपनी मेहनत से कमाया धन... 🤣

आखें करते बात बात पे नम्भ,
जैसे छोटे बच्चे रोते हर दम....

पढ़ते रोज सुब्ह अख़बार की ख़बरें गरम,
यही समझते अपना प्रथम धर्म....

कोई भी बात सीधे से ना कहते,
बस खामोश सोच मैं डूबे रहते...

बातें करते-करते अचानक से बिना बताएं सो जाते,
नींद के आघोश मैं अचानक से खो जाते... 💤

दिल के दर्द मैं भी मुस्कुराते, 🥲
झूठी हॅसी और दांत दिखाते... 🤣

दिल दुखने पर भी नहीं रुकते,
गुस्से से नहीं फुकते...

पत्थर दिल समझते ख़ुद को,
पर मोम सा पिघलते हो....

परिवार मैं जान है बस्ती, 😍
नहीं आता मारना आप को जरा भी मस्ती... 🤣👻

कैसी खुफ़िया है आप की ये हस्ती, 🙄😱
नहीं जानता जिसे कोई भी व्यक्ती.... 🤔🤔
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53. मुस्कुराओ
ओह मेरी बहना नटखट नादान,
क्यु हो आप उदास और परेशान ....

जीवन का है यही दस्तूर,
एक दिन ना चहाते हुऐ भी लोग हो जाते है दूर...

वक़्त अक्सर लोगों को बदल देता है,
कुछ मीठे से प्यारे रिश्तों को कुचल देता है...

बस उन्की यादें रहे जाती है,
लोगों के साथ बीता वक़्त और वो  प्यारी बातें याद आती है...

वक्त्त का है ये अनोखा खेल,
जो कराता जीवन में हमारा नए लोगों से मेल...

हर कोई आता है इक किरदार निभाने,
हमको कुछ नया बताने और सिखाने...

एक जाता है तो दूसरा कोई उससे  बेहतर आता है,
पर जो दिल से रिश्ते निभाना चाहता वो आखिरी साँस तक हर हाल में साथ निभाता है...

रिश्ते खून से या वक़्त से नहीं दिल से बनते है,
जो दूर रहते हुए भी जीवन के उस अनजाने मोड से अंत तक प्यार से निभते है...

डर से डरने का नहीं कोई अर्थ है,
जो भुला कर हमारी कदर चला गया उसके लिए रोना व्यर्थ है...

उनका होना न होना वास्तव में आप के जीवन में निरर्थ है,
आप उनके बिना हँसकर अपने जीवन को जीने में पूरी तरह सक्षम और समर्थ हैं ...

उदास ना हो मेरी बहना,
मुस्कुरा कर दिखाओ मेरी बहना...
दर्द को अपनी प्यारी सी मुस्कान से हरा ओ,
खुश रहो इतना कि गम को भी हसा ओ...

अपनी प्यारी सी मुस्कान से हर गम को मिटा ओ,
दुनिया को खुशी के नए अनोखे रंगों से परिचय कराओ....

बस एक बार मुस्कराओ,
सब का दिल हमेशा के लिए जीत दुनिया को अपना गुलाम बनाओ...
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54. दिल्ली वासी
क्यु कि आप है दिल्ली वासी,
रात की जगह दिन भर लेते इसलिए आप उबासी...

नही रात को वक्त्त पर सोने के आदी,
रात भर बस जाग कर करते अपने समय की बर्बादी...

हर वक़्त रहता आप का दिमाग गरम,
रात भर जागना जैसे आप का परम धर्म ...

शान्त मन वाले अक्सर इस वक्त्त सोए होते है,
नींद के आगोश में खोए होते है...

दिल टूटे दिल्ली के आशिक रात भर जागे होते है,
क्यु कि वो अक्सर किसी की यादों मे खोए होते है...😂

रात भर या तो गुम सुम बैठे होते है,
या जाग कर खामोशी से रोते है...

दिल्ली वालों का दिल अक्सर होता है टूटा ,
क्यु कि होता है उनका प्यार अक्सर उनसे रूठा...

सोचते थे होगा उनके साथ कुछ खास और अनोखा,
पर अंत में मिलता है उन्हें तोहफे में बस प्यार मे धोखा...

वही ऐसे प्यार में दुखी कवितायें लिखते है,
वही ऐसे दिल टूटे और दिल फेंक आशिक की तरह हर चौराहे और मोड पर मिलते है...

वही ऐसे जीवन में numb हुऐ होते है,
क्यु कि वही किसी के प्यार में पूरी तरह से कभी ऐसे dumb हुए होते है...

वही ऐसे ख़ामोश बैठे होते है,
किसी की यादों में मदहोश बैठे होते है...

गम भुलाने को गाने अक्सर उनका साथ निभाते है ,
किसी की यादों मे जब वो बैठे अश्क की नदियों से सागर बनाते है...

झूठे वादे झूठा प्यार,
यही है दिल्ली वालों का कारोबार...
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55. सुन्दरता एक श्राप
लड़के पड़ते जब पीछे,
लड़की को घर पर करते कैद उनके माँ बाप है...
क्या सच में,
सुंदरता एक अभिशाप है ?

लड़की के लिये अक्सर साबित होती उसकी सुंदरता एक ख़तरनाक अपराध है,
लड़की कीं सुन्दरता उसकी सुरक्षा और खुशियो के लिए अक्सर  बांती एक श्राप है...

वक़्त इतना ख़राब है,
कि सुन्दर लड़की होना बन गया भयंकर अपराध है...

लोगों कि निगाहें इतनी ख़राब है,
कि सुन्दर लड़की का घर से बाहर निकलना मानों जैसे कोई पाप है...

लड़की कि सुन्दरता बन जाता माँ बाप के लिये सरदर्द,
जब घर के आसपास मंडराने लगते मोहल्ले भर के लड़के और मर्द ...

सुन्दरता को देख सब हो रहे मदहोश,
उतावले घूम रहे बन ने को उनके दोस्त...

निगाहों में है लोगों के खोठ,
माँ बाप देते बेचारी लड़की को दोष...

डांटते , मारते, पीटते  खो देते होश,
डर के सहमत जाते देख के बाहर वालों का ख़तरनाक जोश...

सुन्दरता एक अभिशाप,
इज्जत खोने के डर में हर पल जीते लड़की के माँ बाप...

ज़माना है ख़राब ,
नहीं किसी की नियत यहां साफ़...

हर किसी के दिल में भर्रा है खोठ,
हर किसी के दिमाग में अपराध...

किस किस को करे अनदेखा ,
किस किस को करे ये माफ़...

हर कोई जलता या लगाता बुरी नजर,
या हर कोई चाहता बनना उनका हमसफर...

हर कोई बनाता झूठी कहानियां और उड़ाता झूठी अफ़वाह ,
कर्ता उनको बदनाम और बुलाता बेवफ़ा बेवजह...

कम उम्र में शादी करा के घर से कर देते उसको विदा,
सुंदरता की अखिर ये कैसी अनोखी साजा...
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56. भूकंप
मेरे सामने धरती कापी
कापी झूम झूम के...

घूमा मेरा सर,
महसूस हुआ रोम रोम मे....

नाची धरती घूमा सर,
हुआ महसूस अजीब सा डर...

कांप गई रूह और आत्मा,
थम सी गई साँसे और फीनका पढ़ गया स्वर...

आया है भूकंप,
जान के दिल में मच गया हड़कंप...

शारीर में जैसे खून जम गया,
जीवन जैसे कुछ पलों के लिए थम  गया...

ज़लज़ले से लगा अजीब सा डर,
जैसे किसी भी पल जाऊँ गा मैं मर...

एक पल लगा जैसे मैं बीमार हूँ,
कमजोरी और चक्कर का शिकार हूँ...

पर समझ आया मैं नहीं धरती बीमार है,
इंसानों के लालच और शोषण का शिकार है...

धरती पर बड़ गया इंसानो का बोझ,
शोषण और पाप से भरी जिनकी अत्याचारी सोच...

करती थी जो प्रकृति उनका प्यार से पालन पोषण,
बिगाड़ दिया उसका संतुलन करके उसका अति शोषण...

रोज आते भूकंप है इसी शोषण का फल,
जिसका नहीं अब किसी के पास कोई भी हल...
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57. पागल इन्सान
हर कोई है पागल यहाँ,
पागल हर इक इंसान है...

नहीं कोई भी सीधा और समझदार,
भरा सब में कूट कूट के घमंड और अहंकार है...

नहीं कोई  भी यहाँ सच्चा,
हर कोई कहीं ना कहीं शैतान है...

सब के मन में गहरा अंधकार,
सब के अपने अपने ख़तरनाक विचार...

कोई पागल पैसे के पीछे,
कोई पागल प्यार में...

कोई पागल ताक़त के घमंड में,
कोई पागल अहंकार में...

कोई पागल लालच में,
कोई पागल सर्कार में...

कोई पागल अपनी वासना में,
तो कोई पागल प्रभु की उपासना में...

कोई पागल अन्नानत जीवन की चाह में,
कोई पागल अपने जीवन के अंत की राह में...

कोई पागल झूठी शान में,
कोई पागल जिसका सर हमेशा आसमान में...

कोई पागल मान समान में,
कोई पागल आपने हुऐ अपमान में...

कोई अपने दुख और गम में पागल,
कोई पागल अपनी खुशी के अभिमान में...

कोई किसी से जलन और ईर्षा में पागल,
कोई पागल किसी के दुख में....

भाँति भाती के पागल मिले गे,
कुछ खतरनाक कुछ प्यारे मिले गे....

भाँति भाँति के पागल है,
हर प्रजाति के पागल है...

नहीं ख़ुश उसमे जो उसे है हांसिल,
हर इंसान कुछ पाने की दौड़ में शामिल .....

ये पागलपन नहीं तो और क्या है,
जहाँ जीवन में पास जो खुशियाँ उन्हें जीने की चाहत की जगह बस कूछ और पाने जलती सब के दिल में लौह है...

मैं भी पागल, तू भी पागल,
पागल सब इससे जहान में....
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58. कहना क्या चाहता हूं
कहना क्या चाहता हूं,
मुझे नहीं पता...

बस लिख रहा हूँ कविता,
जैसे कोई सज्जा...

ना लिखने कि समझ,
ना ही कोई अदा...

बस लिखे जा रहा हूं ,
बेफ़िक्र और बेवजह...

शब्दों से खेल रहा हूं,
कहने को दिल का हाल...

पर नजाने क्या कहना है,
दिल में हैं कयी सवाल...

खुद को जब नहीं समझ पाया मैं,
कैसे समझाऊ मैं अपने सवाल...

कैसे बयान करूँ मैं अपना दर्द,
बिना मचाये कोई बेवजह बवाल...

कैसे कहू मैं दिल का सच,
बिना किसी डर और संघर्ष...

कैसे कहूँ खो गया,
मेरे दिल का हरशो उल्लास...

थक गया अब जीवन से मैं,
नहीं जीवन जीने की कोई चाह और आस...

थक कर हार गया,
जीवन के संघर्षो से...

जीवन जीने की चाह,
मैं तो छोर चुका कयी वर्षों से...

बस कट रहा है वक्त,
अंत के इंतजार में...

बस बंधी है जीवन की डोर,
परिवार के मोह और प्यार में...

बस वही एक वजह,
की चल रहा जीवन बेफ़िक्र बेवजह...
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59. क्या है सच, क्या है झूठ..
क्या है सच, क्या है झूठ..
क्यूँ खो गया हमारे बचपन का वो भोलापन कहीं पीछे छूट....

क्या है सच, क्या है झूठ..
क्यूँ गए हमारे सब अरमान, टूट...

क्या है सच, क्या है झूठ..
क्यूँ रह जाते हम अपने अपमान पर, मुस्कराहट का कडवा घूंट पी कर चुप...

क्या है सच, क्या है झूठ..
क्यूँ गए है कुछ लोग, हम से रूठ...

क्या है सच, क्या है झूठ..
क्यूँ गए जीवन की राह में कुछ अपने, पीछे छूट..

क्या है सच, क्या है झूठ..
क्यूँ गए कुछ प्यारे से अनमोल रिश्ते टूट....

क्या है सच, क्या है झूठ..
क्यूँ गए कुछ सपने टूट...

क्या है सच, क्या है झूठ..
क्यूँ गए अनजाने में, हम से कुछ दिल दुख...

क्या है सच, क्या है झूठ..
क्यूँ हुई जाने अनजाने में, हम से कोई भूल चूक...

क्या है सच, क्या है झूठ..
क्यूँ लगीं अचानक आज ये जवाब पाने की भूख...

क्या है सच, क्या है झूठ..
क्यूँ हो रहा किसी का दिल दुखाने से खुद को इतना दुःख...
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60. उदास मन
अन्दर से है मन उदास,
तो कैसे रहें बिन्दास...

नहीं न्याय की कोई आस,
बस बनके घूम रहे, दुखी दास...

हार गई सब उम्मीदें,
ना रही किसी से कोई आस...

दिल में दाफन कई हजारों राज्,
छुपे हुए कई घहरे, तूफानों भरे ज़ज्बात...

दिल है उदास,
ना कोई ख़ुशी और ना कोई उल्लास...

थक गया मन, करके भक्ति, पूजा और उपवास,
गाकर प्रभु के गुण और बन कर उनका दास...

मन मे भरा बस त्रास,
नहीं रहा किसी पर भी अब कोई विश्वास...

थक गया जीवन भर कर के,
बिन मतलब की बातें बकवास...

नहीं आ रही अब, कोई भी ख़ुशीया रास,
बस दिल चाह रहा  सब छोर के लेना अज्ञात वास और सन्यास...
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61. अधूरी ख्वाहिश 😂
एक बहन आधी अधूरी,
निभाती रिश्ता जैसे कोई मजबूरी...

करती विश्वास कम,
नहीं बटती अपना कभी दिल और गम. ..

करती हरदम ये शक,
हसी में उड़ा देतीं मेरी सब बक बक...

उड़ाती हरदम मेरा मजाक,
साल बाद भी नहीं करतीं ज़रा सा भी विश्वास...


अरे कैसे छोड़ दु,
कैसे ना लिखूं अब आप पर कविता...

जिंदगी भर सुनाओ गे ताना,
कहकर कि आप का कहना नहीं माना ...

लगते हो आप मुझे बहन बुरी,
इसलिए नहीं की मैंने आप की एक छोटी सी ख्वाहिश भी पूरी...

नहीं लिखी आप पर कभी कविता,
नहीं सोचा कभी कि उससे आप पर क्या बीता...

गए अंदर ही अंदर आप कितने टूट,
रहे गई दिल में दफन आप कि ख्वाहिश आधी अधूरी छूट...
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62. दो मार्च
आयीं थीं इस धरती पर नाचती हुईं दो मार्च को,
आते ही अपने जादू से इन्होनें सब का दिल लिया था मोह...

दिन था वो मंगलवार,
जब मनाया गया था 1999 में इनके घर पर धूमधाम से खुशियो का महा पर्व और त्यौहार...

पापा की प्यारी परी,
लाइ थी जीवन में खुशियां कयी...

परिवार की सब से छोटी और सब से लाड़ली बच्ची,
नवाबों की तरह पली पर फिर भी दिल से प्यारी और अच्छी...

इनकी प्यारी सुन्दर मनमोहक छवि,
बनेगी प्रेरणा कभी किसी कवि की  कविता की...

देर रात तक जागती रहतीं लेते हुए कई उबासी,
क्योंकि किताबों और ज्ञान की हमेशा रहती ये भूखी और प्यासी...

भारत देश की हैं ये प्रवासी,
नहीं हारीं ये आज तक कभी भी दिल की कोई बड़ी बाजी...

उत्तर प्रदेश में करती ये वास,
क्यों कि आता इन्हें माँ गंगा का ही बस पानी रास...

हिन्दी भाषा से है इन्हें अती प्रेम और लगाव,
दिल में इनके भरा बस दया और करुणा का भाव...

देश की संस्कृति का इनपर है पूरा प्रभाव,
नहीं हुआ इनके जीवन में कभी भी ज्ञान का कोई अभाव...

जीवन में रहीं हैं सब की चहेती और सभी को रहा है इनसे खूब लगाव,
इसीलिए हमेशा खाती है ये जीवन में सब से भाव...

पढ़ातीं हैं ये स्कूल में नटखट बच्चों को विज्ञान,
करती दूर उनके जीवन का अंधकार और अज्ञान...

करना चाहती कुछ जिस से जीवन में हो इनका बड़ा नाम,
बढ़ाना चाहती बस ये अपने परिवार का मान और समान...
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63. Happy birthday-Feb 28🎂 🥳
फ़रवरी 28,
है बहोत ही खास ये एक date...

भारत वर्ष के लिए स्पेशल,
क्यूँकी  है ये नैशनल साइंस day,
पर हमारे लिए है ये और भी स्पेशल,
क्यूँ कि है ये आप का birthday...

A very very happy birthday...
A very very happy birthday....

अगर पैदा होते आप एक भी दिन late,
तो आज कितने जवाँ होते आप,
सोचों तो जरा mate...

हर चार साल में एक बार आता,
आप का जन्म-दिन,
उम्र से आप अभी भी कहलाते,
जवान और कमसिन हसीन...

बत्तीस के नहीं हुऐ होते आज,
होते आप अभी सोलह साल के ही जवाँ,
हुआ होता आप पर फिदा,
हर इक इन्सान...

आप की सुंदरता लेती,
सब का दिल मोह,
माफ़ी माँगता गिर कर पैरों पर,
आप का ex वो....

आप का ये दिन बने,
आप के लिए और भी ख़ास,
सब दोस्त मिल कर आपकी सेवा ऐसे करे,
जैसे सब आपके हो दास...

सब का भरपूर प्यार,
आपको आए इतना रास,
कि नहीं मेहसूस हो आप को जीवन में,
कोई भी कमी या किसी भी चीज की त्रास...

A very very happy birthday...
A very very happy birthday....

आप का ये जन्मदिन मिटा दे,
आपकी सब खुशियो की प्यास,
आपके जीवन का ये नया साल,
बने आपके लिए बहोत ही खास...

ऊपर वाले की आप पर हो पूरी दया,
आप जीवन का लो पूरा मज़ा..

आपके जीवन से हो,
सब दुख रफा-दफा,
आप के हर दुश्मन को मिल जाए,
उसके किए कि पूरी सजा...

पूरी हो आपकी,
जीवन में हरइक आशा,
नहीं देखना पड़े आप को जीवन में,
दुबारा कभी कोई निराशा...

पूरा हो आपका,
जीवन का हरइक सपना और  ख्वाब,
रहे हमेशा जीवन में आपका,
ऐसे ही मुस्कराता खुशियो भरा प्यारा स्वभाव ..

A very very happy birthday...
A very very happy birthday....

पूरी हो आपकी,
सभी मनोकामना,
कोई भी मुसीबत ना कर सके,
कभी भी टिक कर आप का सामना...

जीवन में जीतो,
आप हर एक जंग,
जीवन में हमेशा भरा रहे आपके,
खुशियो की इंद्रधनुष का सुंदर रंग...

सफलता और कामयाबी,
चूमें आपके कदम,
बस खुशियाँ मिले आपको,
जीवन में हर पल हर दम...

मिले आपको ऐसा,
जीवन साथी खास,
जो धरती पर ही आपको कराए,
स्वर्ग सी खुशियो का एहसास...

आपके जीवन में रहे,
हमेशा खुशियो का वास,
प्रभु से आज हम करते बस,
आपके लिए यही एक अरदास...

A very very happy birthday...
A very very happy birthday....
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64. माँ से एक फ़रियाद
माता रानी करो पूरे सब काम,
रास्ते बना दो जीवन के सब असान...

कर दो एक छोटा सा एहसान,
बस हो जाओ अब मुझ पर मेहरबान...

हर लो सब विघ्न बाधा,
पूरा कर दो अपना वादा...

कर दो पूरी हर एक आशा,
मिटा दो जीवन से हर एक निराशा...

तेरे दर्शन को माँ मैं तरसा,
कर दो माँ अपनी कृपा की वर्षा....

सब अच्छा अच्छा करो माता रानी,
सब पर कृपा करो महारानी...

बस आप से कर रहा हूँ एक फ़रियाद,
पूरी करो माँ अब आप मन की हर इक मुराद...

ले लो मुझे अपनी शरण में,
जगह दो माँ थोड़ी सी अपने चरण में...

इतने से बस भर दो भंडार,
कि दुखी खाली हाथ ना जाए कोई जब आए माँगने मदद हमारे द्वार...

ना जाए कोई खाली हाथ,
ना कभी अनजाने में भी दुखाएँ  किसी का भी दिल या जस्बात...

करो माँ अपनी कृपा इतनी खास,
कि सब पा कर भी बने रहे विनम्र और आप के दास...

भर दो माँ हमारे जीवन में अपनी कृपा इतनी अपार,
ना किसी से कभी भी माननी पढ़े अब हमें हार...

माँ बस दो इतना सा धन,
जो लोगों की मदद करते हुए कभी भी ना पड़े कम...

माँ दो एक ऐसा दिल और एक ऐसा मन,
जो खुद से पहेले खुशी से करे दूसरों का पालन पोषण...

कर दो माँ हर इक रिन्न से आजाद,
भर दो माँ इतने भंडारे आप आज...

दो माँ अच्छे-बुरे की ऐसी पहचान,
ना धोखा दे पाए कभी कोई बेईमान इंसान...

दो माँ ऐसी पारखी परख,
सच और झूठ का हरदम आए नजर फर्क...

मिल जाये माँ ऐसी नजर,
कि ना रहे कभी धोखे का कोई डर...

माँ दो डरों पर ऐसी जीत,
कि ना कर पाए कभी भी कोई भयभीत...

रखना माँ ईर्षा, घमंड और लालच से दूर,
रखना माँ हमेशा हमारे चेहरे पर मुस्कान का सुंदर नूर...

चाहे आये जीवन में कोई भी विपदा या स्तिथि कितनी भी विपरीत,
इतनी कृपा करना माँ कि उसे पाऊँ मैं हस्ते हुऐ जीत...

देना माँ मुझको इतनी शक्ति,
कि बस हर इक साँस में हो माँ आप की ही भक्ति...

माँ देना जीवन में इतनी बुद्धि और ज्ञान,
कि हरदम जीवन में बढ़ता रहे नाम...

देना माँ जीवन में इतना बल,
कि कर पाए दूसरों की हर इक समस्या का भी हल...

कर पाऊँ माँ जीवन में सब की मदद,
दूर कर पाऊँ सब का दुख दर्द हर वक़्त....

जीवन में चले और चलाए सब को सही राह पर अपने साथ,
बना रहे माँ पास हमेशा अपनों का प्यार, साथ और विशवास...

ला पाए हर एक मिलने वाले के जीवन में भरपूर खुशी,
ना रहे हमारे आसपास कभी कोई दुखी...

जीवन को माँ बना दो मेरी खुशियो का डेरा,
जिसमे हमेशा खुशियों से रहे हर कोई अपना मेरा...

माँ दो मेरे अपनों को सुख, शान्ति, अच्छी सेहत और लंबे जीवन का वरदान,
बनाए रखो जीवन में हमेशा उन्ह सब का मान सम्मान...

नहीं आए कभी आन को हानि,
मीठी मनमोहक बनीं रहे हमेशा वाणी...

ना आ पाए माँ कभी जीवन में निराशा का अंधेरा,
जीवन में बनाए रखना बस माँ हमेशा खुशियो का सुनहरा सवेरा...

कभी भी ना आ पाए माँ जीवन में कोई भी दुख पास,
रखना ऐसी माँ आप अपनी कृपा दृष्टि खास...

बस माँ आप से इतनी सी फ़रियाद,
रखना बनाएं हमेशा कृपा हम पर आप...

बचा लेना माँ आप हमारी लाज,
जब भी करे माँ आप को हम दिल से याद....
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65. मनोदशा
मनोदशा के बजे हैं बारह,
इसलिये अब संदेश(मैसेज) कम आता है हमारा...

हर कोई है फिर रहा है यहाँ आवारा,
कोशिश में पाने को किसे एक अपने का प्यार भरा सहारा...

लेकर झूठी मुस्कान का सहारा,
हर कोई जीवन से समझौता कर बस चला रहा है अपना गुजारा...

दिल ही दिल में सब हैं लाचार और बेबस,
सब के जीवन जीने के हौंसले और चाह हो चुकी है पुर्णतः पस्त...

सब अपने अपने जीवन की अनेकों जंग लड़ने में व्यस्त,
जीवन शक्ति सभी की ढलते सूरज कि तरह होती हुई अस्त....

अन्दर से होने पर भी टूटे, बिखरे और ध्वस्त,
हर कोई दिखा रहा ऐसे जैसे  जीवन शान से जी रहा हो वो मस्त...

पहन कर अच्छाई और मुस्कान का सुन्दर नकाब,
हर कोई छिपा रहा है यहाँ अपने दुःख और फरेब जनाब....

दिलों दिमाग में सबके छाया है गहन अंधकार,
मानसिक और भावनात्मक रूप से सब पर अनेकों रूप से किया है खिन्नता और अवसाद(डिप्रेशन) ने गहन वार...

मानसिक और शारीरिक रूप से कर रहा सभी को बीमार,
दृश्य और अदृष्य रूप से कर रहा सब की सेहत पर लगातार प्रहार...

कितने लोग मान कर जीवन से हार,
हर रोज जाते हैं परलोक सिधार...
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66. थक गए
क्या करना है इतना जी के,
क्यूँ करना इतना प्यार, इस जीवन से....

ये सब तो है बस मोह माया का एक सुनहरा जाल,
जिसमे उलझ कर हर इंसान बस होना चाहता माला माल...

कहते है की जीवन में लगी रहती है सुख दुख की छाया,
पर जीवन के अंत में तो सबने बस दुःख ही दुःख है पाया...

थक गया मैं अब जीवन की अवस्था से,
हार गया अब सरकारी व्यवस्था से...

हर तरफ फैली है घूसखोरी और भ्रष्टाचार,
हर तरफ है बस लालच का आतंक और हाहाकार...

है ये कैसा प्रजातंत्र का देश,
जहाँ बाबु शाही के सामने बेबस सारा जनादेश...

जहाँ बिकता है देश का कानून और संविधान,
जहाँ बस नोट पर छपे  बापू ही कर सकते आपकी हर परेशानी का समाधान...

जहा सच और सच्चाई की नहीं कोई सुनवाई,
जहाँ लालच में, भाई को धोखा देता है भाई...

जहाँ लोग अपने बन कर सामने तो देते है बधाई,
पर मौका पाते ही पीठ में खन्नजर घोंप कर बन जाते हैं कसाई...

थक गया जीवन की इस पाठशाला में,
जहाँ हर कोई गम मिटाने का सहारा पाता बस मधुशाला में...
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67. दिल्ली की कहानि मेरी जुबानी
सपनों की राजधानी की कहानी,
सुनो आज तुम मेरी जुबानी,
विराट जिसका आकार,
चलती जहाँ से देश की सरकार....

यहाँ चारों तरफ़ ग़ज़ब भीड़ भाड़,
प्रदूषण से असमान ने ओडि गहरी काली चादर धुआं धार,
हर तरफ बीमारीयों की भरमार ,
पर मज़े से सोयी यहाँ की सरकार...

यहाँ की हवा और पानी,
बन रही जान लेवा फॉर यहाँ के जीव, जन्तु और प्राणी,
प्यारी और मीठी लोगों की वाणी,
पर दिल के अंदर कुछ औऱ ही छिपी चल रही उनके कई खौफनाक कहानी...

लोगो की जनसँख्या है यहाँ आपार,
पर अधिकतर लोग यहाँ करते धोखे का व्यापार,
करते हेरा फेरी से रातों-रात दो का चार,
मीठी छुरी से काट ते जेब सब की बार बार...

हर किसी को बस जीत से प्यार,
नहीं पीछे हट ता कोई करने अपनों पर भी वार,
हर किसी के दिल में छिपा बैठा है एक चोर,
बस लगी है सामने वाले को नीचा दिखाने की होड....

सब अपने घमण्ड में चूर,
एक से बढ़ कर एक गुस्सैल और मगरूर...

सब के जीवन में वक़्त का अभाव,
हडबड में करना गडबड बन गया है सब का स्वाभाव,
रिश्तों में आ रहा इसका दुष्ट प्रभाव,
सब के जीवन में अपनेपन और प्यार का बढ़ रहा यहाँ अभाव...

यहाँ सब का जीवन हो रखा है अस्त व्यस्त,
अन्दर से सब के हौंसले और जीवन जीने की इच्छा है पस्त,
नशे में डूब, कर रहे लोग रहने की कोशिश मस्त,
पर अंदर से तन्हा और अकेला  खडा यहाँ भीड़ में भी हर इक शख्स...

खुशियो के अभाव में मन की शान्ति की सब को तलाश,
गम में भी मुस्कुराते जी रहा हर निराश व्यक्ती बनकर इक जिंदा लाश,
दिल्ली में लोगों के दिल है दूर बाकी सब है पास,
समय और वक्त्त की कमी और अंजना सा त्रास,
फिर भी दुनिया कहती इसे दिल वालों की दिल्ली खास...

दिल्ली जहाँ सब है एक घंटा दूर,
देखने को कई चीज़े यहाँ बहुत सुन्दर और मशहूर,
खाने-पीने का यहाँ अपना ही जादुई नूर,
इसलिए ही तो सारी दुनिया से  लोग यहाँ आने को होते  है मजबूर...
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68. नशा
नशे में इंसान सच कहते,
क्यूँ कि तब उसके दिल के ज़ज्बात बिना रुके बहते...

नशा लाता बाहर इंसान का सच,
क्यूँ कि नशे में कर्ता इंसान बिना सोचे बकबक...

हर कोई अपने जीवन में कभी ना कभी हो जाता किसी ना किसी नशे का शिकार,
क्यूँ कि नशे का नही एक ब्लकि है अनेक प्रकार...

कोई दारू और नशीले पदार्थों के नशे के आधीन,
कोई पैसे और ताकत के नशे में लीन...

कोइ सफलता और घमंड के नशे में चूर,
कोई नाम और शोहरत के नशे में मगरूर...

कोई शारीरिक सुख और वासना के नशे से ग्रस्त,
कोई ईर्षा और जलन के नशे से त्रस्त...

कोई कुछ पाने के नशे में व्यस्त,
कोई झूठी शान दिखाने के नशे में मस्त...

किसी को लोगों को डराने के नशे की लत,
किसी को दूसरों को हराने और नीचा दिखाने का नशा व्यर्थ...

कोई नींद के नशे में डूबा हुआ,
कोई गुस्से के नशे में सब से रूठा हुआ...

कोई प्यार के नशे में बन रहा मुर्ख,
कोई जीत के नशे से बन गया धूर्त...

कोई लोगों को रुलाने के नशे का शिकार,
तो किसी को दूसरों का दिल दुखाने का नशा अपार...

नशे के चाहे हो कितने भी प्रकार,
हर नशा अंत में मचा देता है जीवन में हाहाकार...

मत होना कभी भी जीवन में किसी भी नशे के आदी,
वर्ना ख़ुद कर बैठोगे अपने हाथों ही अपने जीवन की बर्बादी...

मैंने भी बनकर आलस के नशे का शिकार,
कर दिया अंजाने में अपना पूरा जीवन व्यर्थ और बेकार...
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69. दिसंबर में जनमी परी
साल के अंतिम दिनों में धरती पर आई,
अपने संग खुशियो की नई शुरुआत लाई...

दिसम्बर में जनमी ये परी,
देखो आज हो गई कितनी बड़ी...

पर एक समय था आरंभ का,
आनंद और उल्लास से भरा,
जब आकर इस परी ने,
खुद चुना था अपना नाम,
बड़े उत्साह और खुशी से...

सुरों से भरा,
मीठा सुरीला एक नाम,
गर्व से जीवन भर कहलाई सुरभि,
फ़िर ये नन्ही सी जान...

जल परी सी सुन्दर,
धूप की किरनों सी सुनहरी,
सीधी साधी भोली भाली,
छोटी नटखट परी ये प्यारी प्यारी. ..

हँसमुख, चुलबुल,
छोटी सी ये बुल बुल...

झूल झूल कर झूला,
बचपन बीतता है इनका ये पूरा...

कला की थीं ये विद्यार्थि,
बिल्कुल भी नहीं ये जरा सी भी स्वार्थी...

हर वक़्त हंसना और मुस्कुराना,
सब के जीवन में खुशियां लाना,
अपनी मनमोहक बातों से सब का दिल बहलाना,
और जीना जैसे मस्त मौलाना...

कैप्टन अमरीका की दीवानी,
खुशबू सी महकती एक मस्तानी...

गणित से भागती है जो दूर,
जीवन हँसकर पूरा जीती है भरपूर...

चेहरे पर इनके बड़ा सुंदर नूर,
सब की चहीती, बड़ी मशहूर...

मीठे मधुर सुर और ताल,
गालों पर लगाती लाली लाल,
लंबे सुनहरे सुन्दर बाल,
बिल्ली जैसी प्यारी इनकी चाल...

अपने नाम सी मिठास भर देती ये सब के जीवन में,
अपनी मनमोहक आवाज से भर देतीं सुरों का संगीत सब के मन में...

अद्भुत अद्वितीय आकर्षक ये हस्ती,
चुटकुलों और जोक्स पर खुलकर हँसती,
बिल्लियों में इनकी जान है बस्ती,
मासूम सी प्यारी सी ये बच्ची...

खाने-पीने की शौकीन ये लगती,
मस्तीखोर भूखंड ये बच्ची...

मीठा है इनकी कमजोरी,
खाती जो ये सब की नज़र बचा कर चोरी चोरी...

क्यूँ कि किसी से नहीं बांटती ये अपना खाना,
भूखंड ये आदत होती ही है जनाना...
इनकी जेबें में भरा है काफ़ी माल,
जो ना ख़तम हो गा सालों साल....

बैंक में कार्य करना इनका सपना,
हर किसी का पैसा जहाँ हो इनका अपना...

फूलों सी नाज़ुक, फूलोँ सी प्यारी,
फूलन देवी जैसी ये नारी...

सुन्दर, साफ़, आदरणीय सामाजिक छवी,
सुरीली और संस्कारी सुरभि,
ऐसा कुछ नहीं जो इन्होंने चाहा और कर ना सकीं हो कभी,
इसलिए जीवन में इन्हें हरा पाया ना कभी कोई...

मजाकिया और जिंदा दिल,
लेती लाइफ में चिल्ल पिल,
सबसे ज़ाती आसानी से घुल मिल,
इसलिये अपनी बातों से मोह लेती ये सब का दिल...
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70. तन्हा और अकेला
दिल बिल्कुल तन्हा और अकेला,
जेब में नहीं एक भी नया पैसा औऱ एक भी नया ढेला,
फोकट में लोगों नें जीवन भर ख़ूब पेला,
किसी ने नहीं कभी भी मेरी बातों को झेला,
सब ने बस खुद से दूर धकेला,
खड़ा जीवन में थक्केला,
ना कोई दोस्त ना कोई ख़ुशियो का मेला,
फ़िर भी जीवन अलबेला...
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71. प्यार की तलाश में
हर कोई अकेला,
हर कोई तन्हा,
दिल में लिये,
प्यार की चाह बेपनाह...

हर कोई करता,
अनजाने में गुनाह,
दुखाता अपनों का दिल,
हो के लापरवाह...

हर कोई चाहता,
पाना प्यार अपार,
बेसब्र हर कोई,
नहीं इंतजार को तय्यार...

प्यार की तलाश में,
खा कर धोखे अनेक,
बन जाते और तन्हा,
जैसे कुर्सी के बिना खाने की मेज,
जैसे बिना डोर के कटि पतंग एक...

हर कोई तय्यार,
होने को प्यार में फनाह,
पीस जाते जिसमें,
बेचारे बेगुनाह...

टूट कर बिखर जाते,
जैसे जिंदा लाश,
बिना खुशियो के,
बेज़ान जैसे बिना खून के शारीर का मास...

खो देते लोग खुद को,
समेटे दिल में प्यार की आस,
नहीं समझता कोई, कि प्यार,
है इक सुन्दर कला खास,
जिसकी नहीं करनी है खोज,
बस पाने को इसे,
हमें बदलनी है अपनी सोच...

पाने की चाह,
कि जगह लाना है,
देने का उत्साह,
करना है सब से प्यार,
अपनाना है ये पूरा संसार...

बनाते हुए अपना दिल उदार,
रखनी दिल में दया और करुणा अपार...

हृदय खोल सब पर विश्वास जगाना,
हर किसी को खुलकर अपनाना...

नहीं करना ज़ज्बातों का कारोबार,
सब से करना बस खुले दिल से प्यार...

प्यार की कला को अपनाओ,
जैसे दूसरों से प्यार चाहते,
वैसा दुनिया को कर के दिखाओ...

मत बनो प्यार के भिकारी,
बनो प्यार से भरी नदी इक प्यारी,
बनो प्यार के समुंदर अपार,
जिसमें समा जाए सारा संसार...
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72. गुलाब जामुन - गोल गप्पा
आप हो गुलाब जामुन,
मैं हूँ गोल गप्पा...

आप हो बड़े अच्छे,
मैं नटखट नादान बच्चा..

आप हो मीठे-मीठे ,
मैं तीखा और खट्टा-खट्टा...

आप हो बाहर और अंदर दिल से नर्म,
पर मैं बाहर से कड़क और सख़्त एक दम...

मैं हूँ ठंडा-ठंडा,
आप बिलकुल गरम गरम...

बाहर से काले अंदर से गोरे,
पर सब डालें आप पर डोरें,
मीठे-मीठे, प्यारे-प्यारे,
सब के दिल को भाते जा रहे ...

मैं हूँ बाहर से गोरा,
पर अंदर से खोखला और खाली,
छोटी सी चोट भी तोड देती,
मेरी दिखावे की मज़बूत जाली...

आप हो सीधे साधे,
हमेशा दिल में लिए मिठास,
मैं हूँ तेज़ खिलाड़ी,
बदलता जरूरत के साथ हर बारी अपना स्वाद...

कई लोगों के लिए आप की मिठास,
बन जाती एक अभिशाप,
बन जाती बीमारियों का घर और जान लेवा,
इसलिए आप की अति को नहीं कर सकते अनदेखा...

मैं सब का सच्चा यार,
नहीं करता किसी को बीमार,
मैं आज खुशी देता, कल दर्द,
पर कई मर्ज को ठीक करने में, मैं सक्षम और समर्थ...

समा लेता अपने अंदर,
मीठी-ख़ट्टी  सब बातें,
पिघल जाता पल में,
पानी का साथ पाके...
आप नर्म और फूले फूले,
आख़री पल तक रहते खास,
आखिरी दम तक आप में रहती,
वही स्वाद भरी मिठास...

पर खो कर अपना आकर,
मैं हो जाता साथ ही बेकार,
ना रहेता कोई स्वाद,
हो जाता पूरा बर्बाद...

छोटा लंबा हर प्रकार,
का है आप का आकार,
हर रूप में आप को पा कर,
हो जाता सबका सपना साकार...

हर खुशी में करते लोग आप को याद,
पर मौका पाते ही लोग चखना चाहते मेरा स्वाद...

आप को पाने के लिए करनी पड़ती सबको बड़ी मेहनत खास,
पर हर नुक्कड़ चौराहे पर मिलता मैं, जैसे बगीचे कि मिट्टी मे मिलतीं घास...

आप हो बड़े अनमोल, ऊंचे आप के दाम,
मैं हू बड़ा ही आम, गली गली में  बिकता मैं कोड़ियों के दाम...

आप को दिल से चाहते,
घर आने वाले सब मेहमान,
पर मेरी भी बड़ी शान,
ढूंढते मुझे मेरे दीवाने हर दिन सुबह से शाम...

आप राबड़ी के साथ भी आते,
आइस क्रीम के साथ भी जाते,
अकेले भी सब के दिल को भाते,
जीवन में मिठास का स्वाद लाते...

दही से भी मेरी दोस्ती,
पानी भी मेरा अनोखा यार,
पर आलू ही मेरा,
इक लौता सच्चा प्यार...

हम भी एक दूसरे से अलग,
हमारे दोस्त भी एक दूसरे से अलग और अनोखे,
पर अपने दोस्तों के बिना हम दोनों ही फीके,
और अपना स्वाद और अस्तित्व खो देते...

मैं हल्का, आप भारी,
मैं जैसे एक लड़का, आप जैसे एक नारी,
पर एक साथ मिलकर,
हम जीत सकते हैं ये पूरी दुनिया सारी...
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73. मेरी अनमोल भातीजी सारन्या
लाखों में एक, सब से नेक,
समेटे अपने अंदर खूबियां अनेक..

बड़ी कीमती और अनमोल,
प्यारी चुलबुली और गोल मटोल...

नन्हीं शहजादी, शरारती परी..
मुस्कुराहटों की रानी, छोटी जादूगरनी...

देवी सा जिसका नाम,
प्यार से अपनों की रक्षा करना जिसका काम...

सुन्दर सी प्यारी सी कन्या,
मेरी छोटी सी भतीजी सारन्या...

एक प्यारी सी नन्ही सी परी,
एक सुन्दर सी मुस्कुराहट से भरी...

बातों के जादू से मन मोह ले,
नटखट हॅसी से दिल के गम धो दे...

सुंदर लिपि ऐसी जैसे मोती हो पिरोए,
अपनी दुआ से जगाए भाग्य सोए...

भोली और दिल की साफ़,
सब की भूल पल में करे माफ़...

पवित्र और नेक आत्मा,
जिसके दिल में बसते हैॅ परमात्मा...

दिल में समेटे मेरे सब राज़,
मुझे उसपर सच में है बड़ा नाज़...

उसकी बातें और हॅसी आती दिल को बड़ी रास,
उस से बिना मिले दिल हो जाता उदास....

मेरी भतीजी मेरी दोस्त ख़ास,
हमेशा मेरे दिल के करीब और पास...

मुझे जीवन में उससे बड़ी आस,
एक दिन छुएगी उसकी शौहरत आकाश...
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74. छोटी बंदरिया, रोन्दू बिल्ली: स्वाति
छोटी बंदरिया, रोन्दू बिल्ली,
जो आती नहीं मेरे पास दिल्ली...

मेरी लाड़ली भांजी,
जो हमेशा दिखाते हुए अपनी बतीसी कहती है, हाॅ जी...

ज्ञान की देवी और नक्षत्र से मिलता सा नाम,
पर बिल्कुल विपरीत इसका काम...

स्वाति इसका प्यारा नाम,
धमा-चौकड़ी मचाना इसका काम...

बकबक की दुकान सी बातूनी ये गुड़िया,
बनती सब की नानी सी बुढिया...

चुलबुली, नटखट और नादान,
हमेशा करती अपनी शैतानियों से परेशान...

नौ साल की नन्ही परी,
जो हमेशा अपनी जिद्दों पर रहती है अड़ी...

तेज तलवार जैसा धार-दार दिमाग,
एक वार में कर दे सामने वाले को साफ़...

दीखने में भोली,
पर तेज और खतरनाक जैसे बंदूक की गोली...

छोटी सी हूर परी,
जैसे आँखों के सामने आकर हुई हो खड़ी...

दिमाग में हमेशा कोई नई खुराफात,
सामने वाले को देने को शैह और मात...

नहीं हटती पीछे करने को मुक्का और लात,
लगा देती सामने वाले की वाट...

प्यार भरा इसका दिल,
सब से असानी से जाती घुल मिल...

करती भोली भाली बातें,
मारती जोर से घूसे और लाते...

अपने बचपन का आनंद उठाती,
अपनी धुन में गाने गाती...

दुनिया की परेशानियों से अनजान,
छोटी सी प्यारी सी नन्ही सी जान...
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75. आर्या: एक हँसमुख परी
आर्या एक बच्ची माँसाहारी,
पर सीधी, भोली और बड़ी प्यारी..  
सुनो अब मुझसे उनके जीवन की कहानी,  
बुराई और तारीफ सब बारी बारी मेरी जुबानी...

ये हैं बड़ी प्यारी, सब की दुलारी,  
दुनिया से न्यारी, उन्नीस साल की छोटी सी नारी...  
एक सीधी सी भोली सी नेक दिल की प्राणी,  
जो नहीं बिल्कुल भी घमंडी या अभिमानी...

शैतान की बुआ, बातों में सब की नानी,  
जो करती सब की मदद और सब पर मेहरबानी...  
चुलबुली, नटखट, नादान,  
इनकी शैतानियों ही इनकी शान...

मासूम छोटी दो साल की बच्ची से लडती,  
उसको पीट कर खूब हस्ती...🤣  
भांजी के साथ करती खूब मस्ती,  
भांजी क्या, ये तो भाई को पीटने से भी नहीं पीछे कभी हटती...

प्यार से करतीं हाथापाई,  
चॉकलेट और मीठा खिला कर करती उसकी भरपाई...  
गोवा की है दीवानी,  
शहद सी प्यारी मीठी उसकी वाणी...

खाना बनाती लाज़वाब,  
मीठा गुलाब जामुन इनका बनाया, होता बड़ा ही स्वाद...  
इनके बनाए व्यंजन बड़े खास,  
कर के मन को तृप्त, मिटाते जन्मों जन्मों की भूख और प्यास...

एक प्यारी सी, भोली सी, हँसमुख परी,  
अनजाने में जीवन की राह में मुझे मिली...  
हँसती, महकती, खिलखिलाती,  
अपनी बातों से खूब हँसाती...

दिन भर की मस्ती और शरारत बताती,  
फिर मुस्कराकर हॅसते हुए ठहाके
लगाती...  
अपने नटखटपन से मन मोह लेती,  
अपने बातों के जादू से मोतियों सा कीमती और सुंदर खुशियो का हार पिरो देती...

शांत होकर सुनती मेरी सब बात ये
देती अपना कीमती वक़्त निकाल के दिन-रात यें...  
करती मदद सुधारकर कविता की कमियाँ,  
ठीक कर के देती सब लेख की गलतियाँ...

पढाई में तेज और होशियार,  
मजबूत इरादे ले कर जीवन को जीतने को खड़ी तैयार...  
कर के सब की बिमारियों का इलाज,  
बदलना और सुधारना चाहती हैं ये समाज...

सबकी मदद करने को हमेशा तैयार,
करती सब से सच्चे दिल से प्यार,
सुन्दर सुनहरा बनाने को दूसरों का जीवन,  
तत्पर हरदम ये करने को अपना सब कुछ अर्पण...
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76. प्यारी बच्ची निशा
प्यार के मौसम फ़रवरी में आई इक प्यारी बच्ची,
भोली-बाली, सच्ची और अच्छी...

पवित्र दिल, पुण्य आत्मा,
धरती पर जिसको दूसरों के भले के लिए भेजे हैं परमात्मा...

चुलबुली नटखट नादान,
एक नंबर की थी वो शैतान...

नाम है इनका निशा,
करती सब की मदद और दिखाती सब को जीवन में सही दिशा...

लाती है दूसरों के जीवन में उल्लास,
चाहे खुद हो अंदर से कितनी भी दुखी परेशान या उदास...

नहीं इनको दुनियादारी की समझ,
भोली भाली सीधी सादी बिल्कुल बुद्धू और नासमझ...

जीवन में दुख की आँधियों से लड्डकर,
आगे बढ़ती रही वो हँसकर...

बिना अपनों का साथ पाए,
बिना डरे, रुके या शर्माए,
बिल्कुल अकेली आगे बढ़ते जाए...

उनकी अच्छाई उमङ कर आए,
उनका प्यार उसमें सिम्ट कर रहे ना पाए...

जीवन में लोगों की दुआएँ उन्होंने खूब पायी,
जीवन में उनकी अच्छाई और सच्चाई ही थी उनकी असली कमाई...

सूरज की रोशनी, हर्ष की नई ऊषा,
दिलो जान से करती है प्रभु भक्ति और पूजा...

दयालु और दयावान,
जरा भी नहीं करती अपनी नेकी का कभी घमंड या अभिमान...

छोटे बड़े सब को देती बराबर सम्मान,
जीवन जंतु, पशु पक्षी को भी करती ये आदर प्रदान...

टूट कर बिखर कर भी दूसरों को सम्भाला,
प्यारी जैसे सुन्दर फूलोँ की माला...

मीठी प्यारी मनमोहक बातें,
छेङती दिल में प्यारी यादें...

खाती भाव और रूठती ज्यादा,
पर पल में मान जाती ये प्यारी मादा...

खाती प्यार से, सब से भाव,
पर अपनों के लिए लगा दे बिना सोचे अपने जीवन का दाव...

गुस्सा और क्रोध इनका बादलो की छाया,
पल में आया, पल में गया...

जीवन में आए इसके कई विघ्न और बाधा,
पर फिर भी हुआ ना उनकी हिम्मत या हौसला आधा...

अपने लक्ष को दिल से साधा,
और अपने सपनों को पूरा कर डाला...

अनजानों में ढूँढती ये अपनापन और प्यार,
सब पर करती आँख बंध कर के ये ऐतबार...

ताकत और नारी शक्ति की मिसाल,
दिल इनका समुंदर सा गहरा और विशाल...

लोगों की अंधेरी जिंदगी में रोशनी कि किरण,
सुन्दर प्यारी आँखे जैसे हो कोई प्यारा हिरण...

नूर भरी सुनहरी सुन्दर मनमोहक आभा,
पल में सबका दिल मोह ले ऐसी इनकी अदा...

इनकी आंतरिक ज्योति, तेज और निखार,
चमके जैसे सूर्य की रोशनी अपार...

अनोखी, अनदेखी और अद्भुत इनकी शान,
इनके अपनों में बस्ती इनकी जान...

भोली प्यारी सुन्दर मनमोहक मुस्कान,
ये प्यारी सी बच्ची है, भारत का गौरव और अभिमान...
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77. आत्माओं का रिश्ता: दोस्तों का बच्चों सा प्यार
कहते हो आप मुझे जान,
ये है आप का मुझ गरीब पर एहसान...

आप हो एक बेहद ही नेक दिल और प्यारे इंसान,
इसलिए आप पर सच में मुझे अभिमान..

कर्ता हू मैं दिल से आप की इज्ज़त और आप का सम्मान,
आप कि दरियादिली को मेरा सलाम...

आप देते रहते हो उपदेश और ज्ञान,
क्यूँ कि करते हो आप सब का दिल से पूरा ध्यान...

बच्चों की तरह रूठना मानना,
बस आप का है प्यार पाने और अपनापन जताने का बहाना...

आप का प्यार है सब से अलग और नेक,
भोला भाला बचों सा सीधा-सादा मतलब उसका एक...

कि आप हर दुआ में रखते हो मुझे याद,
कि जीवन की हर कठिन राह में  आप हो मेरे साथ...

कि आप समझते हो मुझे अपना दोस्त खास,
क्यूँ की मेरे साथ रहे सकते हो आप अपने सच्चे रूप में बिंदास...

कि आप करते हो दिल से परवाह,
आत्मा और रूह से करते हो मेरे होने का प्रभु को शुक्रिया...

प्यार तो है बस सच्ची दोस्ती और फिक्र का ही एक दूसरा नाम,
यान प्रभु के लिए भक्त की भक्ति और प्रेम समान...

आप का प्यार है प्यारा जैसे राधा और श्याम,
जैसे मीरा या शबरी और राम,
जो सीधा प्यारा पवित्र पर फिर भी कई बार बदनाम...
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78. असलियत का पर्दा: मानवता के भेद और रहस्य
लोगों के नजर आ जाते है असली रंग,
जब होते हैं वो जरा भी तंग...

टूट जाते हैं सब ख्वाब,
जब दिखती है उनकी हकीक़त और हो जाते है वो बेनक़ाब...

सब हैं कितने मतलबी और खुदगरज,
एहसान जताते, पर नहीं निभाते अपना कोई फर्ज...

करते नाटक, नौटंकी और भावनात्मक ड्रामा और शोषण,
नही करते किसी की खुशियो और सपनों का पालन पोषण...

करते भावावेश अत्याचार,
भावनाओं का करते हैं बलात्कार..

मन में उनके छल, कपट, झूठ और फरेब,
करते झूठ के सहारे कंट्रोल और  मैनयुपलेट...

कुविचारी और कुसंस्कारी,
दुराचारी और अति क्रोध धारी...

कपटी और धूर्त,
एक नंबर के झूठे और मुर्ख...

समझते खुद को सबसे समझदार,
भर्रा कूट-कूट के दिल में अंधकार भर्रा अहंकार...

दिमाग पर प़डा है घमंड के अंधेपन का पर्दा,
नहीं अपनी किसी भी झूठ और गलती के लिए ज़रा भीं शर्मिंदा...

जिद्दी, बत्तामीज और बददिमाग,
जैसे किसी ने किया हो जादू टोना या दिया हो इनके श्राप...

नीच, गिरे हुए और घमंडी लोग,
जो अपनी गलतियों का दूसरों को देते है दोष...

बिना मतलब हर समय दिखाते है आक्रोश,
नहीं लेते कोई भी फैसला सोच समझ कर इन पूरे होश...

घटिया और मतलबी लोग,
जिनकी गिरी हुई सोच और विचारों को देख के सच में होता है अफ़सोस...

देख के अपनों के दिल की कालक और फरेब,
उठ जाता भरोसा कि दुनिया में कोई भी बचा है इंसान नेक....
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